भागलपुर में बिहार का सबसे बड़ा कुआं: 400 साल पुराना है इतिहास, अब तक नहीं सूखा पानी; कई बीमारियां होती है दूर

Bihar

भागलपुर31 मिनट पहले

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भागलपुर मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर नगरपारा गांव स्थित एक ऐसा कुआँ जो पौराणिक इतिहास व सभ्यता संजोये है। ऐसा कुआं जो मुगलकालीन है और सैकड़ों वर्ष पुराना है। साके सम्वत 1634 ईसवी में इस कुआं का निर्माण तत्कालीन चंदेल वंश के राजा गौरनारायन सिंह ने करवाया था। यह बिहार में सबसे बड़ा कुंआ के रूप में जाना जाता है। वर्षों पहले जब कुंआ की सफाई हुई तो राधा कृष्ण और लड्डू गोपाल की प्रतिमा समेत कई छोटी छोटी तांबे की प्रतिमा निकली थी।

जिलाधिकारी सुब्रत सेन कुंआ का निरीक्षण करते हुए

जिलाधिकारी सुब्रत सेन कुंआ का निरीक्षण करते हुए

इसके पानी की खासियत यह है कि इससे घेघा( ग्वाईटर) रोग छूट जाता है पानी मे आयोडीन की मात्रा होने से यह रोग खत्म होता है। इसलिए भागलपुर खगड़िया बांका समेत आसपास के जिले के लोग पहुंचते है और इसके पानी का सेवन करते है। बताया जाता है कि पूर्व में इस कुआं में सात रंग में पानी बदलता था और सबसे खास बात यह है कि सैकड़ों वर्ष इस पुराने कुआं का पानी कभी नहीं सूखा इतना ही नहीं बल्कि जब 1934 में भूकम्प आया और भीषण तबाही मचाई तब भी कुआं को नुकसान नहीं हुआ। वर्षों से तारणहार की बाट जोह रहे इस कुआं का जीर्णोद्धार कार्य कराया जा रहा है।

कुएं के पास जुटे लोग

कुएं के पास जुटे लोग

जिलाधिकारी सुब्रत सेन कुआं का निरीक्षण करने पहुंचे तो इसके पौराणिक इतिहास इसकी गोलाई, चौड़ाई और गहराई देख चौंक गए और इसके कायल हो गए उन्होंने अधीनस्थ अधिकारियों को यहाँ बेहतर साजो सजावट, लाइटिंग के निर्देश दिए ताकि जो लोग पहुंचे वो आकर्षित हो और इसकी महत्वता बरकरार रहे। ग्रामीण बताते है कि जब चापाकल नहीं हुआ करता था तब इस कुआं पर पूरे गांव व आसपास के गांवों के लोग यहां स पानी भरकर जाते थे, हरिजन हो या राजपूत हो या ब्राह्मण कोई भेदभाव नहीं था कड़ियाँ उनके लिए अलग थी लेकिन उन्हें भी पानी भरने दिया जाता था।


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